अयोध्या में 5 दिवसीय दीपोत्सव का आगाज, सरयू घाट पर जलेंगे 33 लाख दीएं
5-day Deepotsav begins in Ayodhya 3.3 million earthen lamps

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो रही है। सरयू तट से श्रीराम जन्मभूमि परिसर तक दीपों की रोशनी बिखेरने के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष राम की पैड़ी के 56 घाटों पर 30 लाख दीप सजाए जाएंगे। शहर के मंदिरों, मठों, कुंडों और सार्वजनिक स्थलों पर तीन लाख अतिरिक्त दीप जलाने का लक्ष्य है। इस तरह पूरी अयोध्या को करीब 33 लाख दीपों से रोशन करने की तैयारी की गई है।
दीपोत्सव का मुख्य आयोजन 7 नवंबर को होगा। इस दौरान राम की पैड़ी के घाट लाखों दीपों से जगमगाएंगे। राम मंदिर परिसर को भी विशेष रूप से सजाया गया है। यहां पांच जोन में करीब एक लाख दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। अयोध्या के 241 मठ-मंदिरों और पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र के प्रमुख स्थलों पर भी दीपोत्सव की छटा देखने को मिलेगी। गुप्तारघाट भी इस बार आकर्षण का केंद्र रह सकता है।
अयोध्या के 10वें दीपोत्सव का शुभारंभ उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन राम मंदिर में पहला दीप प्रज्वलित कर करेंगे। उपराष्ट्रपति के रूप में यह उनका पहला अयोध्या दौरा होगा। वह दीपोत्सव में शामिल होने वाले पहले उपराष्ट्रपति भी होंगे।
लेजर शो, ड्रोन और 22 झांकियां होंगी आकर्षण
दीपोत्सव के दौरान राम की पैड़ी और शहर के प्रमुख स्थलों पर लेजर शो, प्रोजेक्शन मैपिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस वर्ष 2,100 स्वदेशी ड्रोन का आकाशीय शो भी खास आकर्षण रहेगा।
रामायण के सातों कांडों पर आधारित शोभायात्रा में 22 कलात्मक झांकियां निकाली जाएंगी। आयोजन के दौरान 2,147 श्रद्धालु एक साथ सरयू महाआरती करेंगे। पांच देशों की रामलीला मंडलियां भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का मंचन करेंगी। इसके अलावा 12 मंचों पर करीब 2,500 कलाकार प्रस्तुतियां देंगे।
दीपोत्सव की व्यवस्थाओं में 35 हजार स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। सुरक्षा और सजावट के लिए 13 थीम आधारित प्रवेश द्वार तथा 20 सेल्फी पॉइंट भी बनाए गए हैं।
लोकनृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम
इस बार दीपोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों की लोक परंपराओं और कलाओं की झलक देखने को मिलेगी। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों समेत देशभर के कलाकार पारंपरिक नृत्य, संगीत और लोक विधाओं की प्रस्तुतियां देंगे।
मथुरा का मयूर और बम रसिया नृत्य, प्रयागराज का ढेढ़िया, बांदा का पाई डंडा और सोनभद्र का मांदल-सिंघा नृत्य प्रमुख आकर्षण होंगे। अयोध्या के कलाकार बधाई, फरुआही, डमरू और शंख नृत्य प्रस्तुत करेंगे। गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया और झांसी का राई नृत्य भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।
उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल का श्रीखोल, ओडिशा का मास्क डांस और झारखंड का पुरुलिया छऊ दर्शकों को देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, बिहार और आंध्र प्रदेश की लोक कलाएं भी प्रस्तुत की जाएंगी।
5,100 गोबर के दीपक भी जलेंगे
दीपोत्सव में गोबर से बने 5,100 दीपक भी रोशनी बिखेरेंगे। रमेश सिंह सेवा संस्थान ने पिरखौली स्थित अस्थायी गोआश्रय स्थल में संरक्षित गोवंश के गोबर से ये दीपक तैयार किए हैं। दीपक मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह को सौंपे गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य गोसंरक्षण को पर्यावरण संरक्षण और गोशालाओं की आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। गोशाला संचालक उत्तम सिंह के मुताबिक, गोबर से दीपक और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। संस्थान ने अगले वर्ष प्रदेश की गोशालाओं के माध्यम से एक लाख गोबर के दीपक दान करने का लक्ष्य रखा है।
दीपोत्सव के आयोजनों के जरिए अयोध्या में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। मुख्य आयोजन के दिन राम की पैड़ी से लेकर शहर के प्रमुख स्थलों तक दीपों की रोशनी से रामनगरी जगमगाने की तैयारी है।
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