‘चचा हैं तो सपा है’, पोस्टर से अखिलेश यादव की तस्वीर भी गायब
शहर के गोमतीनगर स्थित CMS तिराहे के साथ साथ अलग अलग चौराहों पर लगे इन पोस्टरों में सबसे अधिक चौंकाने वाला पहलू यह है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर को पोस्टर से पूरी तरह गायब रखा गया है।

Lucknow Desk : ‘चचा हैं तो सपा है’… ये पोस्टर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगाए गए हैं, जिनकी खूब चर्चा हो रही है। इन पोस्टरों को लेकर चारों तरफ सवाल उठाए जा रहे हैं। आखिर इन पोस्टरों पर सवाल क्यों हो रहे हैं? इसकी वजह है इन पोस्टरों से अखिलेश यादव का गायब होना।
पोस्टर पर लिखा है, ‘चचा हैं तो सपा है।’ यानी समाजवादी पार्टी का वजूद तभी है, जब पार्टी में शिवपाल यादव मौजूद हैं। इन पोस्टरों में दावा किया गया है कि शिवपाल यादव के राजनीतिक करिश्मे और रणनीति की बदौलत ही बीजेपी के मजबूत किले को ध्वस्त किया गया है। ऐसे में इन पोस्टरों के जरिए सपा के भीतर शिवपाल यादव की भूमिका और उनके
राजनीतिक कद को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। यूपी में MLC चुनावों के परिणामों के बाद समाजवादी पार्टी के भीतर की अंदरूनी खींचतान सड़कों पर पोस्टरों के जरिए खुलकर सामने आ गई है।
शहर के गोमतीनगर स्थित CMS तिराहे के साथ साथ अलग अलग चौराहों पर लगे इन पोस्टरों में सबसे अधिक चौंकाने वाला पहलू यह है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तस्वीर को पोस्टर से पूरी तरह गायब रखा गया है। पोस्टर में समाजवादी आंदोलन के पुरोधा डॉ. राम मनोहर लोहिया, पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव, ‘छोटे लोहिया’ जनेश्वर मिश्र, पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा और पार्टी के संस्थापक सदस्य आजम खान की तस्वीरें तो प्रमुखता से लगाई गई हैं, लेकिन वर्तमान पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का चेहरा कहीं भी नजर नहीं आ रहा है।
यह पोस्टर फर्रुखाबाद के सपा नेता राम मूर्ति यादव द्वारा लगवाया गया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की तस्वीर को दरकिनार कर सारा क्रेडिट ‘चचा’ शिवपाल को दिए जाने से संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच भारी कानाफूसी और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
उत्तर प्रदेश के मौजूदा सियासी परिदृश्य में जुबानी बयानों की तुलना में पोस्टरों के जरिए सियासी संदेश देने की होड़ मची हुई है। हाल ही में लखनऊ में कांग्रेस नेताओं की ओर से पोस्टर लगाकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 200 सीटों पर अपनी दावेदारी ठोकते हुए सपा पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया था।



