Mathura BSA Transfer Orders : मथुरा में शिक्षकों की तैनाती पर बड़ा खेल, जांच के लिए कमेटी गठित
मथुरा बेसिक शिक्षा विभाग में प्रभारी प्रधानाध्यापक की तैनाती को लेकर विवाद। करीब 150 शिक्षकों के आदेश निरस्त, तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच

Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश के मथुरा में बेसिक शिक्षा विभाग के अंदर शिक्षकों की तैनाती को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ है कि प्रशासन को करीब 150 शिक्षकों के पदस्थापना आदेश वापस लेने पड़े। प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाने के नाम पर कथित तौर पर मनचाहे स्कूलों में तैनाती देने और नियमों को ताक पर रखने के आरोप सामने आए हैं। मामला जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी तक पहुंचा तो अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए आदेश निरस्त कर दिए। अब इस पूरे प्रकरण की परतें खोलने के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि शिक्षकों की तैनाती में किन नियमों की अनदेखी हुई और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।
हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में मनमानी का आरोप
जानकारी के मुताबिक, मथुरा के बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने 26 सितंबर और 22 अक्टूबर को प्रभारी प्रधानाध्यापकों की तैनाती से संबंधित आदेश जारी किए थे। आरोप है कि इन आदेशों में हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया गया, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति करते समय विभागीय नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
शिकायतों के अनुसार, तैनाती में शिक्षकों की वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया। इसके अलावा छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के मानकों का भी ध्यान नहीं रखा गया। कुछ मामलों में पति-पत्नी को एक ही विद्यालय में तैनात करने और एआरपी को गलत विद्यालय दर्शाकर प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाने के आरोप भी लगे हैं।
कहीं स्कूल बंद होने की नौबत, कहीं सिर्फ एक शिक्षक
तैनाती के इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर सवाल सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि शिक्षकों को एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय भेजने में ऐसी गड़बड़ी हुई कि कुछ स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई।
स्थिति यह बताई जा रही है कि कुछ विद्यालय बंद होने की कगार पर पहुंच गए, जबकि कई स्कूलों में केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई की जिम्मेदारी रह गई। इससे बच्चों की शिक्षा और स्कूलों के संचालन पर असर पड़ने की आशंका जताई गई।
DM और CDO तक पहुंचा मामला, 150 आदेश निरस्त
शिक्षकों की तैनाती में कथित अनियमितताओं की शिकायत जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह और मुख्य विकास अधिकारी तक पहुंची। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने पूरे प्रकरण की समीक्षा कराई।
इसके बाद करीब 150 शिक्षकों के पदस्थापना आदेश निरस्त कर दिए गए। साथ ही वास्तविक स्थिति का पता लगाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है।
व्यक्तिगत आदेशों से भी पसंदीदा स्कूल देने का आरोप
इस पूरे मामले में एक और अहम आरोप सामने आया है। कहा जा रहा है कि विभाग की ओर से जारी सामूहिक सूचियों के अलावा कुछ शिक्षकों को अलग-अलग व्यक्तिगत आदेश जारी करके भी मनचाहे विद्यालयों में तैनाती दी गई।
ऐसे में जांच का दायरा केवल जारी की गई सूचियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यक्तिगत आदेशों की भी पड़ताल की जा सकती है।



