बलिया में मंत्री जेपीएस राठौर का अखिलेश यादव पर हमला, बोले- “मौलाना के चरणों में जाने वाले अब शंकराचार्य के चरणों में”
JPS Rathore : मंत्री राठौर ने आरोप लगाया कि यह सब केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सनातन आस्था करोड़ों लोगों की श्रद्धा का विषय है और इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। बलिया पहुंचे योगी सरकार के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अखिलेश यादव के हाल के धार्मिक कार्यक्रमों और शंकराचार्य से मुलाकात को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का सनातन से कभी कोई संबंध नहीं रहा और अब राजनीतिक फायदे के लिए उसकी आड़ ली जा रही है।
दरअसल, बलिया में सहकारिता विभाग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मंत्री जेपीएस राठौर से जब अखिलेश यादव की हिंदुत्व वाली छवि को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि “समाजवाद का सनातन से कोई लेना-देना नहीं है। सनातन धर्म की रक्षा करने वाले हम लोग हैं। हम हिंदू धर्म की रक्षा करेंगे। किसी को भ्रम फैलाने की आवश्यकता नहीं है।”
मंत्री राठौर ने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और समझ रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का अब तक का राजनीतिक चरित्र रहा है, उसे प्रदेश की जनता अच्छी तरह जानती है। उनके मुताबिक, “सनातन धर्म के लोग इस तरह की राजनीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
इसी दौरान उन्होंने अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “मौलाना के चरणों में गिरने वाले अब शंकराचार्य के चरणों में गिर रहे हैं। उनको लग रहा है कि वहां से बात नहीं बन रही है, इसलिए अब इनके चरणों में लेट रहे हैं। यही समाजवादी पार्टी का चाल और चरित्र रहा है।”
मंत्री राठौर ने आरोप लगाया कि यह सब केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि सनातन आस्था करोड़ों लोगों की श्रद्धा का विषय है और इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कई धार्मिक कार्यक्रमों में नजर आए हैं। शंकराचार्य से उनकी मुलाकात के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी लगातार समाजवादी पार्टी की मंशा पर सवाल उठा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी खुद को सभी धर्मों का सम्मान करने वाली पार्टी बताती रही है।



