दिलजीत से क्यों नाराज हुए अभिजीत दिपके? शिकागो कॉन्सर्ट और जून की टिप्पणी का किया जिक्र
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिलजीत दोसांझ से नाराजगी की वजह बताई। कहा- आज भी गाने सुनता हूं, सम्मान पहले जैसा है।

Lucknow Desk : किसी कलाकार का प्रशंसक होना और उसके हर विचार से सहमत होना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। यही बात कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की एक सोशल मीडिया पोस्ट में सामने आई है। मशहूर पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करने वाले दिपके ने अब बताया है कि आखिर जून में ऐसा क्या हुआ था, जिससे उन्हें ठेस पहुंची। हालांकि, उनकी शिकायत के बावजूद दिलजीत के प्रति प्रशंसा और सम्मान आज भी बरकरार है।
अभिजीत दिपके ने शनिवार को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा कर अपनी भावनाएं जाहिर कीं। उन्होंने साफ किया कि दिलजीत से उनकी नाराजगी किसी व्यक्तिगत वजह से नहीं थी। बल्कि, जून में प्रदर्शन के दौरान गायक की एक टिप्पणी ने उन्हें निराश किया था। दिपके के मुताबिक, उन्होंने हमेशा दिलजीत को ऐसा कलाकार माना है, जो सामाजिक और दूसरे अहम मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता है। इसलिए उस टिप्पणी से उन्हें उम्मीद के विपरीत प्रतिक्रिया मिलने जैसा महसूस हुआ।
जून की टिप्पणी से क्यों आहत हुए अभिजीत दिपके?
अपनी पोस्ट में अभिजीत दिपके ने बताया कि जून में जब वे प्रदर्शन कर रहे थे, उस दौरान दिलजीत दोसांझ की एक टिप्पणी उन्हें अच्छी नहीं लगी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें दुख इस बात का था कि वे दिलजीत को हमेशा ऐसे शख्स के तौर पर देखते आए हैं, जो मुद्दों पर खुलकर बोलता है।
दिपके ने अपनी नाराजगी को व्यक्तिगत विवाद का रूप देने से भी इनकार किया। उनका कहना था कि दिलजीत के प्रति उनके मन में पहले से सम्मान रहा है और इसी वजह से उनकी टिप्पणी का असर उन्हें महसूस हुआ।
आज भी सुनते हैं दिलजीत के गाने, शिकागो कॉन्सर्ट का भी किया जिक्र
अभिजीत दिपके ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि वह लंबे समय से दिलजीत दोसांझ के प्रशंसक रहे हैं और उनकी नाराजगी के बावजूद यह रिश्ता खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आज भी वह दिलजीत के गाने सुनते हैं।
दिपके ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि इसी साल मई में भारत लौटने से पहले वह शिकागो में दिलजीत के संगीत कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उनके मुताबिक, वहां जाने की वजह केवल दिलजीत का संगीत नहीं था, बल्कि एक कलाकार और इंसान के तौर पर उनके प्रति मन में मौजूद सम्मान भी था।
एक असहमति से खत्म नहीं होता किसी के प्रति सम्मान
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि किसी एक मुद्दे पर असहमति या गलतफहमी होने का मतलब यह नहीं है कि सामने वाले के प्रति वर्षों से बना सम्मान खत्म हो जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिलजीत को लेकर उनकी प्रशंसा आज भी कायम है।
दिपके की इस पोस्ट का मूल संदेश यही है कि किसी व्यक्ति का प्रशंसक होने का अर्थ उसकी हर बात का समर्थन करना नहीं होता। विचारों में मतभेद होने के बावजूद किसी के काम और व्यक्तित्व का सम्मान किया जा सकता है।



