कांवड़ यात्रा पर AIMIM प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का बड़ा बयान, बोले: सड़कें न कांवड़ के लिए हैं, न नमाज के लिए
योगी आदित्यनाथ के पुराने बयान का हवाला देते हुए शौकत अली ने कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे बंद करने और रूट डायवर्जन पर उठाए सवाल, सभी धार्मिक आयोजनों के लिए समान नीति की मांग।

Lucknow Desk : एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का कांवड़ यात्रा और सड़कों के उपयोग को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़क पर नमाज को लेकर दिए गए पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि यदि सड़कें आम लोगों के आवागमन के लिए हैं, तो यही सिद्धांत सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
शौकत अली ने कहा, “सड़कें चलने के लिए होती हैं, न कि कांवड़ के लिए होती हैं और न ही नमाज के लिए होती हैं। यह बात मैं नहीं कह रहा हूं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं। अगर सरकार का यही सिद्धांत है कि सार्वजनिक सड़कें केवल यातायात के लिए हैं, तो उसका पालन हर स्थिति में होना चाहिए।”
उन्होंने कांवड़ यात्रा के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख मार्गों पर होने वाले यातायात प्रतिबंधों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर नेशनल हाईवे बंद कर दिए जाते हैं, रूट डायवर्ट किए जाते हैं और आम लोगों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। इससे मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और आम यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
एआईएमआईएम नेता ने कहा कि धार्मिक आयोजनों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ आम जनता की सुविधाओं और अधिकारों का भी ध्यान रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे धार्मिक कार्यक्रम भी शांतिपूर्वक संपन्न हों और आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।
शौकत अली ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान अनावश्यक रूप से पूरे हाईवे बंद न किए जाएं और जहां तक संभव हो, यातायात को सामान्य बनाए रखने की व्यवस्था की जाए। उनका कहना था कि रूट डायवर्जन और लंबे समय तक सड़कें बंद रहने से लोगों की परेशानी बढ़ जाती है, इसलिए इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि यदि सड़कों के उपयोग को लेकर सरकार एक समान नीति की बात करती है, तो उसका पालन सभी धार्मिक आयोजनों पर समान रूप से होना चाहिए। किसी एक समुदाय या एक आयोजन के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को कानून और व्यवस्था के साथ-साथ आम नागरिकों की सुविधा का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए।



