बंद स्कूलों पर अखिलेश का बड़ा दांव! ‘PDA पढ़ेगा’ के नारे से 2027 की सियासत में मचेगी हलचल?
शिक्षक दिवस पर शुरू हुआ ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान, सपा का दावा- 26 हजार स्कूल बंद; गांव-गांव पहुंचेगी पार्टी

लखनऊ। शिक्षक दिवस के मौके पर समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के मुद्दे को लेकर योगी सरकार के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 5 सितंबर से प्रदेश के बंद प्राथमिक विद्यालयों में ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। अभियान का मुख्य संदेश है— ‘बंद स्कूल खुलेगा, तो PDA पढ़ेगा।’
26 हजार स्कूल बंद होने का दावा
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में करीब 26 हजार प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं। सपा का कहना है कि शिक्षक दिवस के अवसर पर पार्टी गांव-गांव और बंद स्कूलों तक पहुंचेगी।
अभियान के दौरान शिक्षकों का सम्मान करने के साथ ही बंद सरकारी स्कूलों को दोबारा खोलने की मांग भी उठाई जाएगी।
हालांकि, 26 हजार स्कूल बंद होने का आंकड़ा अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का राजनीतिक दावा है। इसे सरकारी आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
स्कूलों के मुद्दे पर लंबे समय से सरकार को घेर रहे अखिलेश
अखिलेश यादव लंबे समय से सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। बीते अगस्त में उन्होंने दावा किया था कि मार्च 2017 में प्रदेश में 1,13,938 सरकारी प्राथमिक विद्यालय थे और इसके बाद 26 हजार से अधिक स्कूल बंद किए गए।
उन्होंने सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में कमी और शिक्षकों के रिक्त पदों का मुद्दा भी उठाया था।
‘PDA’ से जोड़ा शिक्षा का मुद्दा
समाजवादी पार्टी सरकारी स्कूलों के मुद्दे को अपने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण से जोड़ रही है। पार्टी का कहना है कि सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में बड़ी संख्या इन्हीं सामाजिक वर्गों से आती है।
अखिलेश यादव का तर्क है कि गरीब और वंचित परिवारों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में स्कूलों का बंद होना सीधे तौर पर इन वर्गों के बच्चों की शिक्षा और भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
शिक्षा को सामाजिक बदलाव का माध्यम बता रहे अखिलेश
अखिलेश यादव ने शिक्षा को सिर्फ रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का जरिया बताया है। उनका कहना है कि शिक्षा के जरिए शोषित, वंचित और पिछड़े समाज में सामाजिक एवं राजनीतिक चेतना को मजबूत किया जा सकता है। इससे भेदभाव कम करने और सामाजिक न्याय की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
5 से 11 सितंबर तक चलेगा अभियान
सपा के अनुसार, सपा छात्र सभा के नेतृत्व में ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान 5 से 11 सितंबर तक चलाने की तैयारी है। पार्टी इसे केवल बंद स्कूलों को दोबारा खोलने की मांग तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में पेश कर रही है।
शिक्षक दिवस पर शुरू हुआ यह अभियान ऐसे समय में शुरू किया गया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनने लगी हैं।
क्या 2027 में बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘पाठशाला पुकारे’ अभियान क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन पाएगा? सपा अगर सरकारी स्कूल, शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था के सवाल को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में सफल रहती है, तो यह मुद्दा उसके PDA सियासी समीकरण को धार देने की कोशिश का अहम हिस्सा बन सकता है।
हालांकि, इसका राजनीतिक असर कितना होगा और इसका लाभ किस दल को मिलेगा, यह आने वाले समय में ही साफ होगा। फिलहाल शिक्षक दिवस पर शुरू हुए इस अभियान ने सरकारी स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था को एक बार फिर यूपी की सियासत के केंद्र में ला दिया है।



