आपत्तिजनक Video वायरल हुआ तो सस्पेंड हो गए बिजनौर के दारोगा, नौकरी जाते ही महिला कांस्टेबल से कर ली शादी
Bijnor sub-inspector suspended after objectionable video went viral

बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में इंस्पेक्टर नीरज तोमर और महिला कांस्टेबल पिंकी सैनी से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। बढ़ापुर थाने के प्रभारी पद से निलंबित किए जाने के कुछ दिन बाद दोनों का एक नया वीडियो सामने आया है। करीब 32 सेकंड के इस वीडियो में दोनों मंदिर में एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार करने की बात कहते नजर आ रहे हैं। हालांकि, महिला पुलिसकर्मी वीडियो में यह भी कहती हैं कि कानूनी अड़चनों के कारण उनका औपचारिक विवाह अभी नहीं हुआ है और आगे कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसलिए वीडियो के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि दोनों का कानूनी विवाह हो चुका है।
वीडियो में दोनों लोगों से अपने निजी रिश्ते में अनावश्यक दखल न देने की अपील भी करते हैं। इसके सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके रिश्ते और विवाह की स्थिति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल, उनके विवाह की कानूनी स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
मामले की शुरुआत बढ़ापुर थाने के आधिकारिक WhatsApp ग्रुप में कथित आपत्तिजनक वीडियो साझा किए जाने के आरोप से हुई थी। आरोप लगा कि तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक नीरज तोमर ने ग्रुप में करीब एक मिनट 13 सेकंड का वीडियो भेजा था, जिसे बाद में हटा दिया गया। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद बिजनौर के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने जांच के निर्देश दिए। संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए गए और जांच रिपोर्ट के आधार पर निरीक्षक के निलंबन की कार्रवाई की गई। इसके बाद बढ़ापुर थाने की जिम्मेदारी दरोगा धर्मेंद्र कुमार को सौंपे जाने की खबर सामने आई।
इस बीच, महिला कांस्टेबल ने कथित आपत्तिजनक वीडियो को फर्जी बताते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए उनकी छवि खराब करने और उन्हें परेशान करने की कोशिश की जा रही है। उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कथित वीडियो की वास्तविकता, उसे किसने साझा किया और किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ—इन पहलुओं पर जांच का निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
सोशल मीडिया पर दोनों के मंदिर में शादी करने की चर्चा है, लेकिन वीडियो में महिला पुलिसकर्मी खुद कहती हैं कि कानूनी अड़चनों के चलते अभी औपचारिक विवाह नहीं हुआ है। दोनों के एक-दूसरे को जीवनसाथी स्वीकार करने के बयान और कानूनी रूप से संपन्न विवाह के बीच अंतर है। दोनों के वैवाहिक हालात या पुलिस सेवा के नियमों के उल्लंघन से जुड़े दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वायरल वीडियो के आधार पर इन दावों को तथ्य नहीं माना जा सकता।
अब जांच के अंतिम निष्कर्ष, महिला कांस्टेबल के आरोपों की पुष्टि और विवाह से जुड़ी कानूनी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। फिलहाल, निलंबन के बाद सामने आए नए वीडियो ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और पुष्ट तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि वायरल वीडियो अपने आप में सभी आरोपों या दावों का प्रमाण नहीं है।



