यूपी में भाजपा को मिल गया मजबूत दलित चेहरा, कमलेश पासवान के आवास पर पार्टी के नेताओं की मुलाकात
BJP finds a strong Dalit face in UP meeting at Kamlesh Paswan residence

गोरखपुर। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान के गोरखपुर स्थित आवास पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मुलाकात के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी पासवान को राज्य में दलित नेतृत्व के प्रमुख चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
हालांकि, इस मुलाकात के राजनीतिक उद्देश्य को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए इसे किसी नई जिम्मेदारी या रणनीति का संकेत मानना अभी अटकल ही है।
लगातार चौथी बार सांसद बने पासवान
कमलेश पासवान का राजनीतिक अनुभव और पूर्वांचल में उनकी पकड़ उन्हें भाजपा के अहम नेताओं में शामिल करती है। वह एक बार विधायक रह चुके हैं और बांसगांव लोकसभा सीट से लगातार चौथी बार सांसद चुने गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में उन्हें केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बनाया गया।
बांसगांव और आसपास के क्षेत्रों में उनकी राजनीतिक उपस्थिति के साथ-साथ दलित समाज में उनकी पहचान को भी भाजपा की चुनावी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। उत्तर प्रदेश में दलित मतदाता चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभाते हैं, ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उनसे मुलाकात पर राजनीतिक नजरें टिकना स्वाभाविक है।
नेतृत्व की भूमिका को लेकर अटकलें
भाजपा नेताओं के इस जमावड़े के बाद यह चर्चा भी तेज हुई है कि प्रदेश में दलित नेतृत्व को लेकर पार्टी की भविष्य की रणनीति क्या होगी और उसमें पासवान की भूमिका कितनी अहम हो सकती है। लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मुलाकात किसी संगठनात्मक चर्चा, व्यक्तिगत भेंट या आगामी राजनीतिक कार्यक्रम से जुड़ी थी।
आधिकारिक पुष्टि के बिना पासवान को प्रदेश में किसी नई या बड़ी भूमिका के लिए तैयार किए जाने का दावा नहीं किया जा सकता। फिलहाल गोरखपुर की यह मुलाकात उत्तर प्रदेश भाजपा में दलित नेतृत्व और आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है।



