‘मस्जिद बनाइए, लेकिन नाम बाबरी मत रखिए’, हुमायूं कबीर से मौलाना शहाबुद्दीन की अपील
Maulana Shahabuddin Razvi on Humayun Kabir: पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद निर्माण से जुड़े ऐलान ने एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। इस मुद्दे पर अब यूपी से भी आवाज उठने लगी है। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा है कि बाबरी मस्जिद का विवाद अब बीते दौर की बात है और इसे दोबारा चर्चा में लाना उचित नहीं है।

Lucknow Desk : बाबरी मस्जिद का नाम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को नई मस्जिद की नींव रखने का ऐलान किया है। खास बात यह है कि वह इस मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद रखना चाहते हैं। उनके इस फैसले पर अब उत्तर प्रदेश से भी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पुराने विवाद को दोबारा जिंदा करना ठीक नहीं है।
हुमायूं कबीर के ऐलान से फिर चर्चा में आया बाबरी मस्जिद का मुद्दा
हुमायूं कबीर पहले भी बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद बनाने की घोषणा कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले उनके इस बयान की काफी चर्चा हुई थी। इस घोषणा के बाद उन्हें मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग का समर्थन भी मिलता दिखाई दिया था। हालांकि, उनके बयान से राजनीतिक विवाद बढ़ा और तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
इसके बावजूद हुमायूं कबीर ने अपनी राजनीतिक राह जारी रखी और चुनाव में जीत हासिल कर विधायक बने। अब 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में मस्जिद निर्माण शुरू करने के उनके नए ऐलान ने एक बार फिर इस मुद्दे को सुर्खियों में ला दिया है।
मौलाना शहाबुद्दीन ने नाम बदलने की दी सलाह
हुमायूं कबीर के ऐलान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि बाबरी मस्जिद अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है और वहां राम मंदिर का निर्माण हो चुका है। ऐसे में इस मुद्दे को दोबारा उठाकर समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी को भी मस्जिद बनाने से रोकने की बात नहीं है, लेकिन उसके नाम को लेकर विवाद खड़ा करना उचित नहीं होगा। मौलाना ने हुमायूं कबीर से अपील की कि वह मस्जिद का निर्माण जरूर कराएं, मगर उसका नाम बाबरी मस्जिद रखने के बजाय कोई दूसरा अच्छा और खूबसूरत नाम चुनें।
6 दिसंबर की तारीख ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
इस पूरे मामले में 6 दिसंबर की तारीख भी खास महत्व रखती है। इसी दिन वर्ष 1992 में अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इसके बाद लंबे समय तक राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का विवाद अदालत में चला। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया और मस्जिद के लिए अलग जमीन देने का आदेश दिया। अब उसी तारीख पर पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद नाम से नए निर्माण की घोषणा ने राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।
यूपी की राजनीति में भी पड़ सकता है असर
हुमायूं कबीर के इस ऐलान का असर केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में भी बाबरी मस्जिद का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बनने लगा है। मौलाना शहाबुद्दीन की प्रतिक्रिया से साफ है कि इस प्रस्ताव को लेकर मुस्लिम समाज के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।



