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‘प्रदर्शन के नाम पर कहीं भी कब्जा नहीं कर सकते’, दिल्ली प्रोटेस्ट पर भड़के CJI

CJI said over Delhi protests You cannot occupy any place for protest

नई दिल्ली। सेंट्रल दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों से कारोबार प्रभावित होने का आरोप लगाने वाली व्यापारियों की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी एक जगह पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध करने का अधिकार सभी को है- किसानों और वकीलों को भी, इसलिए प्रदर्शन स्थलों का इस्तेमाल तय समय-सीमा के भीतर होना चाहिए।

सुनवाई पिछले महीने जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों और अन्य लोगों के निर्वाचन आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में हुई। प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाने की प्रक्रिया पर भी अदालत में चर्चा हुई।

संसद और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च पर SG की दलील

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 20 जुलाई को प्रदर्शन की अनुमति केवल एक दिन के लिए दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने जगह खाली नहीं की। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारी संसद तक मार्च कर गए और कहा कि संसद या सुप्रीम कोर्ट तक मार्च नहीं किया जा सकता। मेहता ने यह भी कहा कि बिना अनुमति ऐसा प्रदर्शन नहीं बुलाया जा सकता जिससे लोगों की आजीविका प्रभावित हो।

आजीविका और प्रदर्शन के अधिकार पर बहस

व्यापारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि प्रदर्शनों और रैलियों के कारण कारोबार को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान बिक्री प्रभावित होने से दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों की आजीविका पर असर पड़ता है। अदालत ने इस संदर्भ में पूछा कि ऐसी जगह कहां तय की जाए, जहां प्रदर्शन का अधिकार कायम रहे और गरीब व्यापारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित न हो।

अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि रामलीला मैदान प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल रहा है और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा नहीं हुई। हिंसा को लेकर पेश दलीलों पर CJI ने कहा कि अदालत के सामने दो परस्पर विरोधी दावे हैं।

निगरानी और फेसियल रिकग्निशन पर सवाल

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेसियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के कथित इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि निगरानी किस कानून के तहत की जा रही है और जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल कौन और किस उद्देश्य से करता है।

तुषार मेहता ने जवाब दिया कि सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करते समय निजता के अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि याचिका के बाद निर्धारित प्रदर्शन स्थलों पर CCTV निगरानी की व्यवस्था की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों की संस्था किराना कमेटी की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में त्योहारों के मौसम में सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की गई है। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया है।

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