उत्तर प्रदेश

Ayodhya : रामलला के चढ़ावे में अब पूरी पारदर्शिता, हर चरण कैमरे की निगरानी में

राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था लागू, दानपात्र से गणना कक्ष तक हर प्रक्रिया की होगी वीडियोग्राफी

Lucknow Desk : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब रामभक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान की पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ट्रस्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही न हो और पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।

नई व्यवस्था के तहत 25 जुलाई से दानपात्र से लेकर गणना कक्ष तक हर चरण की वीडियोग्राफी की जा रही है। इसके लिए ट्रस्ट ने विशेष निगरानी व्यवस्था बनाई है। पूरी प्रक्रिया की देखरेख के लिए आठ सदस्यीय टीम तैनात की गई है। साथ ही 360 डिग्री कैमरों और एसएलआर कैमरों की मदद से हर गतिविधि रिकॉर्ड की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी चरण की जांच आसानी से की जा सके।

राम मंदिर परिसर में करीब 40 दानपात्र स्थापित हैं। पहले इन सभी दानपात्रों को एक साथ खाली किया जाता था, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत अलग-अलग दिनों में दानपात्र खाली किए जा रहे हैं। इससे पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाया गया है। ट्रस्ट का मानना है कि इस तरीके से निगरानी बेहतर होगी और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी।

दानपात्र खाली करने की पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार की जा रही है। सबसे पहले गणना कक्ष से खाली बक्सा निकाला जाता है। इसके बाद उसे संबंधित दानपात्र तक ले जाया जाता है। दानपात्र में मौजूद नकदी और अन्य चढ़ावे को उस बक्से में रखा जाता है। इसके बाद बक्से को सीलबंद कर दोबारा गणना कक्ष तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की लगातार वीडियोग्राफी की जाती है, ताकि हर गतिविधि का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।

ट्रस्ट ने इस काम के लिए दो पेशेवर वीडियोग्राफरों की नियुक्ति की है। ये कर्मचारी 360 डिग्री कैमरा और एसएलआर कैमरे से पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग कोणों से रिकॉर्ड करते हैं। इसके अलावा निगरानी टीम में दो बैंक कर्मचारी, दो ट्रस्ट प्रतिनिधि और दो एसआईएस सुरक्षा कर्मी शामिल किए गए हैं। सभी सदस्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं।

दान से भरा बक्सा जब गणना कक्ष में पहुंचता है, तब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों की मौजूदगी में उसे विधिवत सीलबंद किया जाता है। इसके बाद तय प्रक्रिया के अनुसार दान की गणना की जाती है। ट्रस्ट का कहना है कि बैंक अधिकारियों की मौजूदगी से पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता और मजबूत होती है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि रामभक्तों की आस्था और विश्वास उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसलिए दान व्यवस्था में सुरक्षा और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उम्मीद है कि चढ़ावे की सुरक्षा को लेकर श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत होगा तथा भविष्य में इस तरह की किसी भी अनियमितता की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकेगा।

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