उत्तर प्रदेश
राहुल गांधी की आवाज की जांच पर कोर्ट का फैसला, वॉयस सैंपल की मांग खारिज, अब हाईकोर्ट की तैयारी।
एडीजे-5 की विशेष अदालत ने एमपी/एमएलए कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, 18 जुलाई को मानहानि मामले में होगी अगली सुनवाई

Lucknow Desk : कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में सुल्तानपुर की एडीजे-5 की विशेष अदालत ने वादी पक्ष की वॉयस सैंपल मिलान की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने एमपी/एमएलए कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को सही ठहराते हुए रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया।
कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा नेता विजय मिश्रा के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि आदेश की कॉपी मिलने के बाद वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का रुख करेंगे। वहीं, मानहानि के मूल मामले में अगली सुनवाई 18 जुलाई को सुल्तानपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट में होगी।
राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि राहुल गांधी की आवाज और साक्ष्य के रूप में पेश की गई सीडी में दर्ज आवाज का फॉरेंसिक जांच के माध्यम से मिलान कराने की मांग को लेकर रिवीजन याचिका दाखिल की गई थी। इस मामले में दोनों पक्षों की बहस 1 जुलाई को पूरी हो गई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 15 जुलाई की तारीख तय की थी।
निचली अदालत ने भी खारिज की थी मांग
इससे पहले एमपी/एमएलए कोर्ट ने भी राहुल गांधी का वॉयस सैंपल लेकर सीडी में मौजूद आवाज से मिलान कराने की मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद भाजपा नेता विजय मिश्रा की ओर से 21 मई को सेशन कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की गई थी। बुधवार को विशेष अदालत ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी।
2018 में दर्ज हुआ था मानहानि का मामला
यह पूरा मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा की ओर से अक्टूबर 2018 में दर्ज कराए गए मानहानि मुकदमे से जुड़ा है। आरोप है कि राहुल गांधी द्वारा एक बयान को लेकर मानहानि की गई थी। मामले में राहुल गांधी 20 फरवरी 2024 को सुल्तानपुर की अदालत में पेश हुए थे, जहां विशेष मजिस्ट्रेट ने उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत दी थी। राहुल गांधी ने 26 जुलाई 2024 को एमपी/एमएलए कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया था। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए मामले को राजनीतिक साजिश बताया था। इसके बाद अदालत ने वादी पक्ष को साक्ष्य पेश करने के निर्देश दिए थे। इससे पहले भी कोर्ट में धारा 313 सीआरपीसी के तहत राहुल गांधी का बयान दर्ज किया जा चुका है। कोर्ट ने उन्हें अपना पक्ष रखने और सफाई पेश करने का अवसर दिया था। फिलहाल वॉयस सैंपल जांच की मांग खारिज होने के बाद अब सभी की नजर 18 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है।



