यूपी के शिक्षकों और कर्मचारियों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा, ₹5 लाख तक के उपचार का रास्ता साफ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में माध्यमिक वित्तविहीन और संस्कृत विद्यालयों के 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा, बेसिक शिक्षा विभाग के 1,22,305 कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी कैशलेस उपचार की सुविधा देने की बात कही गई है।

Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षकों और कर्मचारियों को इलाज के खर्च से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद पात्र लाभार्थियों को ₹5 लाख तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने का रास्ता साफ हुआ है। इस फैसले से कर्मचारियों के साथ उनके परिवारों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में हुई कैबिनेट बैठक में माध्यमिक वित्तविहीन और संस्कृत विद्यालयों में काम करने वाले 48,062 गैर-शिक्षण कर्मचारियों को योजना में शामिल करने का फैसला लिया गया। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग के 1,22,305 कर्मचारियों और उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को भी इस सुविधा का लाभ देने की बात कही गई है।
इस व्यवस्था का मकसद गंभीर बीमारी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के समय कर्मचारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। योजना के तहत पात्र लोगों को तय शर्तों के अनुसार सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज कराने की सुविधा मिल सकेगी। इससे इलाज के लिए तत्काल बड़ी रकम जुटाने की परेशानी कम हो सकती है।
हालांकि, योजना का लाभ कब से मिलेगा और इसके लिए क्या पात्रता निर्धारित की जाएगी, इसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
वहीं, सोनभद्र में शिक्षकों से बातचीत के दौरान इस योजना को उपयोगी बताया गया। इस दौरान मांग की गई कि सरकार इसे जल्द लागू करे, ताकि शिक्षक, अनुदेशक और शिक्षामित्र भी जल्द से जल्द इसका लाभ उठा सकें।
अब योजना के लागू होने की प्रक्रिया और पात्रता से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। इससे लाभार्थियों को सुविधा का लाभ लेने के नियमों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।


