नकली दवा फैक्ट्री का खुलासा, देहरादून से करीब एक करोड़ की दवाएं और मशीनें बरामद
लखनऊ से शुरू हुई जांच पहुंची उत्तराखंड, एफएसडीए और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई सामने आई है। लखनऊ के अमीनाबाद में नकली दवाओं की बरामदगी के बाद शुरू हुई जांच अब उत्तराखंड के देहरादून तक पहुंच गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) उत्तर प्रदेश और क्राइम ब्रांच गाजियाबाद की संयुक्त टीम ने देहरादून में चल रही एक अवैध दवा फैक्ट्री का खुलासा किया है। यहां से करीब एक करोड़ रुपये कीमत की नकली दवाएं, पैकेजिंग सामग्री और दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनें बरामद की गई हैं।
इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह पूरा मामला कई राज्यों में फैले नकली दवा नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
अमीनाबाद से शुरू हुई जांच ने खोली बड़ी साजिश
मामले की शुरुआत 19 जुलाई को लखनऊ के अमीनाबाद थाना क्षेत्र में हुई कार्रवाई से हुई थी। यहां नकली दवाओं के भंडारण और बिक्री के मामले में 43 तरह की दवाएं बरामद की गई थीं। जांच के दौरान जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की गई तो कई अहम सुराग मिले।
एफएसडीए की विशेष टीम ने मोबाइल चैट, सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड और पैकेजिंग के तरीकों की जांच शुरू की। इसी दौरान पता चला कि नकली दवाओं की सप्लाई करने वाला नेटवर्क गाजियाबाद और उत्तराखंड तक फैला हुआ है।
जांच में राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा का नाम सामने आया। उसे गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया। उसके मोबाइल की जांच में नकली दवा पैकिंग, मशीनों और सप्लाई से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। इन्हीं डिजिटल सबूतों के आधार पर देहरादून स्थित फैक्ट्री तक पहुंच बनाई गई।
देहरादून फैक्ट्री में मिली बड़ी मात्रा में सामग्री
आरोपी की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश एफएसडीए, क्राइम ब्रांच गाजियाबाद और उत्तराखंड एफएसडीए की टीम ने देहरादून के ईस्ट होपटाउन क्षेत्र में छापा मारा। वहां एक परिसर में नकली दवाओं के निर्माण की तैयारी चल रही थी।
मौके से अलू-अलू पैकिंग मशीन, स्ट्रिप मशीन, प्रिंटर, कंप्रेसर, स्टेबलाइजर, बड़ी संख्या में अधूरी तैयार टैबलेट और कैप्सूल, प्रिंटेड फॉयल, रैपर और कार्टन बरामद किए गए।
जांच में सामने आया कि बिना वैध लाइसेंस के दवाओं का निर्माण किया जा रहा था और उन्हें बड़ी कंपनियों की पैकिंग में भरकर बाजार में भेजने की तैयारी थी।
बड़ी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल
छापेमारी के दौरान कई प्रसिद्ध दवा कंपनियों के नाम से तैयार नकली पैकिंग सामग्री मिली। अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने ऐसी पैकेजिंग तैयार की थी जिससे आम ग्राहक के लिए असली और नकली दवा में अंतर करना मुश्किल हो सकता था। मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस गिरोह की पूरी सप्लाई चेन और आर्थिक नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
नकली दवाओं के खिलाफ जारी रहेगा अभियान
एफएसडीए अधिकारियों ने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नकली दवा बनाने और बेचने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों का लक्ष्य केवल नकली दवाओं को जब्त करना नहीं, बल्कि उनके निर्माण से लेकर बाजार तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। इस कार्रवाई को नकली दवा कारोबार के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।



