वोटर लिस्ट के आंकड़ों में बड़ा फर्क, हाईकोर्ट ने चुनाव आयोगों से मांगा जवाब
SIR के बाद विधानसभा सूची से 2.89 करोड़ नाम हटे, पंचायत सूची में 16.1 करोड़ मतदाताओं का दावा

Lucknow Desk : लखनऊ में पंचायत और विधानसभा की मतदाता सूचियों के आंकड़ों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ग्राम पंचायत में दोनों वोटर लिस्ट के बीच 468 मतदाताओं का अंतर सामने आने का दावा किया गया है। इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल की गई है, जिस पर कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग समेत संबंधित पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
याचिका में दावा किया गया है कि एक ही ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में पंचायत और विधानसभा की वोटर लिस्ट के बीच 468 मतदाताओं का अंतर है। याचिकाकर्ता के अनुसार संबंधित ग्राम पंचायत में कुल करीब 2,000 मतदाता हैं। ऐसे में 468 वोट का अंतर कुल मतदाताओं का लगभग 23.4 फीसदी बैठता है।
याचिका में इस अंतर को केवल एक गांव तक सीमित मामला नहीं बताया गया है। दावा किया गया है कि जिला स्तर पर यह अंतर 5 लाख 25 हजार से अधिक और पूरे प्रदेश में 3 करोड़ 51 लाख से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचता है।
याचिका के मुताबिक पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची राज्य निर्वाचन आयोग तैयार करता है, जबकि विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची भारत निर्वाचन आयोग के स्तर पर तैयार होती है। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि जब दोनों सूचियों को तैयार करने की प्रक्रिया में समान क्षेत्र और संबंधित सरकारी मशीनरी शामिल रहती है, तो मतदाताओं की संख्या में इतना बड़ा अंतर कैसे हो सकता है।
याचिका में कहा गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद विधानसभा की मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम हटा दिए गए। वहीं, पंचायत की मतदाता सूची में करीब 16.1 करोड़ मतदाता होने का दावा किया गया है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।



