कानपुर देहात मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्रिंसिपल निलंबित, वायरल फोटो के बाद हुई कार्रवाई
नोटों की गड्डियों के साथ तस्वीर वायरल होने पर स्वास्थ्य विभाग सख्त, जांच पूरी होने तक प्रिंसिपल को किया गया निलंबित।

Lucknow Desk : कानपुर देहात के मेडिकल कॉलेज में कार्यरत कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. हरप्रीत सिंह को स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल होने के बाद की गई, जिसमें उनके साथ एक अन्य डॉक्टर टेबल पर रखी नोटों की गड्डियों के पास दिखाई दे रहे थे। मामले ने तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी थी। अब उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर डॉ. हरप्रीत सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि दो दिन पहले सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और दस्तावेज तेजी से वायरल हुए थे। वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि तस्वीर में कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. हरप्रीत सिंह और डॉ. विमल यादव नोटों की गड्डियों के साथ बैठे नजर आ रहे हैं। तस्वीर सामने आने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया। डीजी (हेल्थ) को पूरे प्रकरण की जांच का जिम्मा सौंपा गया। इसके साथ ही डॉ. हरप्रीत सिंह के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। जांच पूरी होने तक उन्हें उनके पद से हटा दिया गया है।
हालांकि, डॉ. हरप्रीत सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वायरल की गई तस्वीरों और दस्तावेजों के जरिए उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सभी के सामने आ जाएगी।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में केवल डॉ. हरप्रीत सिंह ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड सीएमएस वंदना सिंह यादव, फार्मासिस्ट चंद्रकांत और डॉ. विमल यादव के नाम भी शामिल हैं। पोस्ट में इन लोगों पर भ्रष्टाचार से जुड़े कई आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ कुछ बिल और अन्य दस्तावेज भी साझा किए गए, जिनके आधार पर अनियमितताओं का दावा किया जा रहा है।
वायरल आरोपों में कहा गया है कि कुछ वेंडरों को नियमों के विपरीत काम दिलाया गया। इसके अलावा 146 नर्सिंग स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया में भी गड़बड़ी होने का आरोप लगाया गया है। पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ अधिकारियों के राजनीतिक संबंधों का फायदा उठाकर कई फैसले लिए गए। वहीं लॉन्ड्री टेंडर और दवाओं की खरीद में भी नियमों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
फिलहाल इन सभी आरोपों की जांच की जा रही है और अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कदम उठाए जाएंगे।
अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। जांच के नतीजे आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल तस्वीरों और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।



