योगी के मंत्र से गूंजा विधि विश्वविद्यालय, युवाओं में भरा नया जोश
इस अवसर पर उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण संदेश “सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः” का उल्लेख किया। इसका अर्थ है सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो और अध्ययन में कभी आलस्य मत करो।

Lucknow Desk : आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय पहुंचे। जहां सीएम ने पाँचवें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों और नवोदित अधिवक्ताओं को संबोधित किया। सीएम ने एक एक प्रेरणादायक संदेश प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री जी ने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को एक मुकदमे के उदाहरण के माध्यम से समझाया। उन्होंने कल्पना की कि यदि हमारा केस नंबर 2047 हो, विषय विकसित भारत हो और 140 करोड़ भारतवासी उसके याची हों, तो इस मुकदमे को जीतने के लिए किस प्रकार की दलीलें प्रस्तुत करनी होंगी।
यह उदाहरण हमें समझाता है कि किसी भी बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए केवल संकल्प पर्याप्त नहीं है। उसके समर्थन में ठोस तथ्य, विश्वसनीय साक्ष्य, तार्किक विचार और ईमानदार प्रयास भी आवश्यक हैं। जिस प्रकार एक अधिवक्ता अपने पक्ष को मजबूत बनाने के लिए प्रमाणों और तर्कों का सहारा लेता है, उसी प्रकार राष्ट्र निर्माण के लिए भी सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व जरूरी हैं।
इस अवसर पर उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण संदेश “सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः” का उल्लेख किया। इसका अर्थ है सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो और अध्ययन में कभी आलस्य मत करो। ये शब्द केवल प्राचीन गुरुकुलों की परंपरा नहीं, बल्कि आज के विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और प्रत्येक नागरिक के जीवन के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत हैं।
दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को स्वीकार करने का भी क्षण है। नई उपाधि के साथ नई जिम्मेदारियाँ भी आती हैं।
विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब ज्ञान के साथ चरित्र, अधिकारों के साथ कर्तव्य और संकल्पों के साथ ईमानदार कर्म भी जुड़ेंगे। यही शिक्षा का सार, न्याय का आधार और राष्ट्र निर्माण का सच्चा मार्ग है।



