16 जुलाई को है भगवान श्री जगन्नाथ रथ यात्रा, क्या है नवकलेवर की पवित्र परंपरा
Jagannath Rath Yatra : पुरी की दिव्य रथ यात्रा, नवकलेवर की रहस्यमयी परंपरा और ब्रह्म पदार्थ से जुड़ी आस्था की पूरी जानकारी

Lucknow Desk : हर साल बड़े धूमधाम से भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा का इंतजार भक्त पूरे साल करते हैं। इस पवित्र यात्रा में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त इस यात्रा में शामिल होता है, उसे भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद मिलता है और उसके जीवन के बिगड़े काम बनने लगते हैं। भगवान की कृपा से जीवन में सुख, शांति और खुशहाली आती है।
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में सदियों से चली आ रही एक खास परंपरा निभाई जाती है, जिसे नवकलेवर कहा जाता है। यह परंपरा तब होती है जब आषाढ़ महीने में अधिकमास आता है। इस समय भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन की पुरानी लकड़ी की मूर्तियों की जगह नई मूर्तियाँ बनाई और स्थापित की जाती हैं। इसे भगवान के नए रूप को अपनाने की प्रक्रिया माना जाता है।
नई मूर्तियों के लिए विशेष नीम (दारु) के पेड़ों का चयन किया जाता है। इन पेड़ों को मंदिर के मुख्य पुजारी और सेवक धार्मिक नियमों के अनुसार चुनते हैं। माना जाता है कि इन पेड़ों में कुछ खास निशान होने चाहिए और वे पूरी तरह पूजा के योग्य होने चाहिए। इन पेड़ों की लकड़ी से ही भगवान की नई मूर्तियाँ बनाई जाती हैं।
यह पूरी प्रक्रिया बहुत गोपनीय होती है। उस समय मंदिर के अंदर केवल कुछ खास पुजारी और सेवक ही रहते हैं। आम लोगों को या अन्य सेवकों को इस प्रक्रिया को देखने की अनुमति नहीं होती। माना जाता है कि इसी दौरान पुरानी मूर्तियों से एक पवित्र चीज, जिसे ब्रह्म पदार्थ कहा जाता है, निकाला जाता है और उसे नई मूर्तियों में रखा जाता है। यह काम धार्मिक विधि से किया जाता है।
ब्रह्म पदार्थ के बारे में आज तक कोई साफ जानकारी नहीं है। यह क्या है, इसे किसी ने पूरी तरह नहीं देखा है। कुछ पुजारियों का कहना है कि इसे महसूस किया जा सकता है, लेकिन देखा नहीं जा सकता। इसलिए यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है।
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म पदार्थ को भगवान श्रीकृष्ण के हृदय से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण के शरीर छोड़ने के बाद उनका हृदय सुरक्षित रखा गया था और वही आज भी भगवान जगन्नाथ की मूर्ति में मौजूद है। लेकिन इसका कोई पक्का सबूत नहीं है, यह सिर्फ आस्था की बात है।
भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा और नवकलेवर की यह परंपरा करोड़ों लोगों की आस्था का बड़ा हिस्सा है। हर साल लाखों भक्त पुरी आकर भगवान के दर्शन करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा की एक बड़ी पहचान भी है।



