Lucknow : दीवारों पर छिड़ी सियासी जंग, पोस्टरों के जरिए तेज हुआ चुनावी हमला
यूपी चुनाव से पहले पोस्टर वार तेज, लखनऊ में सपा और कुर्मी समाज हितकारिणी सभा के बीच पोस्टरों के जरिए सियासी हमला

Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजधानी लखनऊ में राजनीतिक माहौल गर्म होता नजर आ रहा है। शहर के 1090 चौराहे पर लगे पोस्टरों ने एक बार फिर सियासी बहस को तेज कर दिया है। अलग-अलग संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए पोस्टरों के जरिए एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
1090 चौराहे पर कुर्मी समाज हितकारिणी सभा के राष्ट्रीय महामंत्री योगेश सिंह पटेल की ओर से लगाए गए पोस्टर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से कई सवाल पूछे गए हैं। पोस्टर में सवाल किया गया है कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब गैर-यादव पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया गया। पोस्टर में यह भी लिखा गया है कि समाजवादी पार्टी का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) का नारा केवल दिखावा है और वास्तविकता इससे अलग है।
इन पोस्टरों के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से भी जवाबी पोस्टर लगाए गए। सपा मुख्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टरों में प्रदेश सरकार पर आरक्षण के मुद्दे पर मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। पोस्टर के जरिए दावा किया गया कि सरकार आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का काम कर रही है और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
इसी बीच समाजवादी सेवक हल्लू रामसुंदर यादव की ओर से भी एक नया पोस्टर लगाया गया। इस पोस्टर में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव की तस्वीर लगाई गई है। पोस्टर के माध्यम से संदेश दिया गया है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव और वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में डिंपल यादव की भूमिका को केंद्र में रखकर पार्टी आगे बढ़ेगी।
पोस्टरों के जरिए राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। कहीं सरकार पर आरक्षण में मनमानी का आरोप लगाया गया है तो कहीं चंदा वसूली और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को उठाया गया है। चुनाव नजदीक आते ही पोस्टर राजनीति के जरिए जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
फिलहाल लखनऊ में शुरू हुई यह पोस्टर वार प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में चुनावी माहौल और गरमाने के साथ इस तरह के सियासी हमलों के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक दल अब पोस्टर, सोशल मीडिया और जनसभाओं के माध्यम से एक-दूसरे को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।



