जौहर यूनिवर्सिटी मामले में नक्शों और जमीन की रिपोर्ट पर बहस तेज, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
राज्य पक्ष ने अधूरे रिकॉर्ड और इमारतों की सुरक्षा पर उठाए सवाल, जौहर पक्ष ने PWD से पुराने दस्तावेज मंगाने की मांग की

Lucknow Desk : रामपुर की चर्चित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में कमिश्नर कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य पक्ष और जौहर पक्ष के अधिवक्ताओं के बीच दस्तावेजों को लेकर तीखी बहस हुई। मामला यूनिवर्सिटी परिसर के लेआउट प्लान, भवनों के नक्शे और जमीन की पैमाइश से जुड़ी रिपोर्ट को लेकर है। सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। फिलहाल मामले में यथास्थिति यानी स्टेटस को बरकरार रखा गया है और पहले से जारी स्टे भी कायम है।
राज्य पक्ष की ओर से DGC अधिवक्ता दिनेश चौहान ने कोर्ट में कहा कि जौहर पक्ष को भवनों के नक्शे और संबंधित दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए गए थे। उनके मुताबिक, जौहर पक्ष ने खुद रिकॉर्ड पेश करने के बजाय श्रम विभाग से पुराने दस्तावेज मंगाने के लिए तीन अलग-अलग अर्जियां दाखिल कर दीं। राज्य पक्ष ने इन अर्जियों का विरोध किया।
सुनवाई के दौरान जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का मुद्दा भी सामने आया। राज्य पक्ष के अनुसार, तहसील से गाटा संख्या, शत्रु संपत्ति और नदी की जमीन से जुड़े निर्माण की विस्तृत रिपोर्ट अभी पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है। रिपोर्ट अधूरी होने के कारण उसे अदालत में दाखिल नहीं किया जा सका। राज्य पक्ष ने यूनिवर्सिटी परिसर में बनी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए और इस संबंध में रिकॉर्ड की जरूरत बताई।
वहीं, जौहर पक्ष की ओर से अधिवक्ता जुनैद अयाज ने राज्य पक्ष की दलीलों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 तक तैयार हुई 14 इमारतों और 13 ब्लॉक से संबंधित रिकॉर्ड PWD रामपुर के पास उपलब्ध है। उनका कहना है कि इन्हीं पुराने दस्तावेजों को अदालत के सामने लाने के लिए संबंधित विभाग से रिकॉर्ड तलब करने की मांग की गई है।
जौहर पक्ष ने मामले में की जा रही कार्रवाई के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए। अधिवक्ता का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और कार्रवाई की कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही मामले पर आगे फैसला होना चाहिए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कमिश्नर कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत का नया आदेश आने तक मौजूदा स्थिति में किसी तरह के बदलाव पर रोक रहेगी। यानी मामले में यथास्थिति और स्टे दोनों बरकरार हैं।
अब सभी की नजर अदालत के अगले आदेश पर है। फैसला आने के बाद ही यह साफ होगा कि नक्शों, जमीन के रिकॉर्ड और यूनिवर्सिटी की इमारतों से जुड़े विवाद में आगे की कानूनी कार्रवाई किस दिशा में जाएगी।



