Pilibhit : राहुल-अखिलेश की हिरासत बनी मुद्दा, सड़क पर उतरी कांग्रेस-सपा
पीलीभीत में विपक्षी दलों का संयुक्त प्रदर्शन, सरकार पर लोकतंत्र दबाने का आरोप

Lucknow Desk : दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में लिए जाने के विरोध में बुधवार को पीलीभीत में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज की भी निंदा की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष चब्बा और समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह के नेतृत्व में दोनों दलों के सैकड़ों कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का संवैधानिक अधिकार है, जिसे किसी भी परिस्थिति में दबाया नहीं जाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे विपक्षी नेताओं और छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि छात्रों की मांगों और आवाज को बल प्रयोग के जरिए दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। नेताओं ने कहा कि यदि किसी मुद्दे पर छात्र और विपक्ष अपनी बात रखना चाहते हैं तो सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए, न कि दमनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार पूरी तरह विफल रही है। इसके साथ ही गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी नारे लगाए गए और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए। नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए सरकार को विपक्ष की आवाज सुननी चाहिए।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष चब्बा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन कोई अपराध नहीं है। यदि विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं और छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाएगा तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए चिंताजनक स्थिति होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को विरोध की आवाज को दबाने के बजाय जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह ने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों और विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई कर सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
प्रदर्शन खत्म होने के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दिल्ली की घटना की निष्पक्ष जांच कराने, छात्रों के साथ कथित बल प्रयोग की जांच, लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेने की मांग की गई।
पूरे प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस बल तैनात रहा। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वापस लौट गए। इस दौरान दोनों दलों के कई पदाधिकारी, महिला कार्यकर्ता, युवा नेता और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।



