Umashankar Singh की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से लोगों ने दी विदाई
रसड़ा विधायक के निधन से शोक में डूबा बलिया, अंतिम यात्रा में उमड़ा लोगों का भारी हुजूम

Lucknow Desk : बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता और बलिया के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे उमाशंकर सिंह के निधन के बाद शुक्रवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे। सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने यह दिखा दिया कि उमाशंकर सिंह की लोगों के बीच कितनी मजबूत पकड़ थी।
उमाशंकर सिंह का निधन 5 अगस्त को गुरुग्राम स्थित फोर्टिस अस्पताल में हुआ था। उनके निधन की खबर मिलते ही बलिया सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर फैल गई। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर लखनऊ लाया गया, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बसपा प्रमुख मायावती सहित कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हर तरफ लोग भावुक नजर आए और “उमाशंकर सिंह अमर रहें” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
शुक्रवार को जब अंतिम यात्रा उनके गांव से शुरू हुई तो रास्ते भर लोगों की भीड़ उमड़ती चली गई। बलिया शहर के चित्तू पांडेय चौराहे पर हजारों लोग अपने नेता की एक झलक पाने के लिए जमा हो गए। सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों ने नम आंखों से उमाशंकर सिंह को अंतिम विदाई दी।
अंतिम यात्रा में शामिल कई लोगों ने उन्हें गरीबों और जरूरतमंदों की आवाज बताया। लोगों का कहना था कि उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में आम जनता से जुड़कर काम किया। यही कारण है कि उनके निधन के बाद हर वर्ग के लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
लोगों ने बताया कि उमाशंकर सिंह ने अपने क्षेत्र के विकास के लिए कई काम किए। रसड़ा विधानसभा क्षेत्र में उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों की अक्सर चर्चा होती रही। इसी वजह से उन्हें क्षेत्र में विकास से जुड़े नेता के तौर पर पहचान मिली।
उनकी लोकप्रियता केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं थी। बलिया और आसपास के जिलों में भी बड़ी संख्या में लोग उन्हें सम्मान देते थे। यही कारण रहा कि उनकी अंतिम यात्रा में दूर-दराज से लोग शामिल होने पहुंचे।
चित्तू पांडेय चौराहे से जब उनका पार्थिव शरीर गुजरा तो माहौल भावुक हो गया। लोग लगातार उनके सम्मान में नारे लगाते रहे। कई लोगों की आंखों में आंसू थे और हर कोई अपने प्रिय नेता को आखिरी बार देखने के लिए वहां मौजूद था।
उमाशंकर सिंह के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने राजनीति को केवल पद के रूप में नहीं देखा, बल्कि जनता की सेवा का माध्यम माना। उनकी कार्यशैली और लोगों से जुड़ाव ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
बलिया के राजनीतिक इतिहास में किसी नेता की अंतिम यात्रा में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का शामिल होना चर्चा का विषय बना हुआ है। उमड़ी भीड़ यह बताने के लिए काफी थी कि उमाशंकर सिंह ने अपने जीवन में लोगों के बीच विश्वास और सम्मान हासिल किया था।
उनके निधन से बलिया की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हुआ है। समर्थक और आम लोग उन्हें लंबे समय तक याद करते रहेंगे।



