संसद में हंगामा जारी, बिना चर्चा पास हुए तीन अहम बिल
लोकसभा में नारेबाजी के बीच एनसीडीसी संशोधन और केरल नाम परिवर्तन विधेयक ध्वनि मत से पारित, राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बाद ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल पास

Lucknow Desk : लोकसभा में नारेबाजी के बीच एनसीडीसी संशोधन और केरल नाम परिवर्तन विधेयक ध्वनि मत से पारित, राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बाद ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल पास
संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में हंगामा और नारेबाजी देखने को मिली। विपक्ष के विरोध और लगातार जारी गतिरोध के बीच लोकसभा में दो अहम विधेयक बिना चर्चा के ध्वनि मत से पारित कर दिए गए। वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बाद ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल, 2026 को मंजूरी दे दी गई।
लोकसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की ओर से पेश किया। इस विधेयक का मकसद राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में बदलाव करना है। सरकार का कहना है कि इससे सहकारी समितियों को मिलने वाली फंडिंग की प्रक्रिया तेज और अधिक लचीली होगी।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम यानी एनसीडीसी सहकारिता मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संस्था है। यह देश में सहकारी समितियों को वित्तीय मदद देने और उनके विकास को बढ़ावा देने का काम करता है। संशोधन के बाद एनसीडीसी की भूमिका को और व्यापक बनाने का प्रस्ताव है, ताकि देश के अलग-अलग सहकारी क्षेत्रों को बेहतर तरीके से वित्तीय सहायता मिल सके।
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव
लोकसभा में केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026भी हंगामे के बीच पारित हो गया। इस विधेयक में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे सदन में पेश किया।
विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे। विपक्ष 20 जुलाई को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी और उनके बयान की मांग कर रहा था। हंगामा जारी रहने के कारण विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी और इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और नित्यानंद राय ने विधेयक पर चर्चा नहीं करने को लेकर विपक्ष की आलोचना की।
राज्यसभा में ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल पास
राज्यसभा में विपक्ष के वॉकआउट के बाद ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल, 2026 को पारित किया गया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य अधिकरणों की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
क्या हैं ट्रिब्यूनल रिफॉर्म बिल के प्रावधान?
विधेयक में राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार, यह आयोग अधिकरण व्यवस्था के लिए स्वतंत्र, पारदर्शी और संस्थागत ढांचा तैयार करने में मदद करेगा।
विधेयक में अधिकरणों के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए 5 साल के कार्यकाल का प्रावधान किया गया है। यह कार्यकाल निर्धारित ऊपरी आयु सीमा के अधीन होगा। पात्रता के लिए अलग से कोई न्यूनतम आयु सीमा तय नहीं की गई है।
अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्ते और अन्य सेवा शर्तों को नियमों के जरिए तय करने का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से न्याय तक पहुंच आसान होगी, कारोबार करना सुगम होगा और अधिकरणों में पारदर्शिता व कार्यक्षमता बढ़ेगी। साथ ही न्यायिक स्वतंत्रता को मजबूत करने और लोगों को समय पर प्रभावी न्याय दिलाने में भी मदद मिलेगी।



