Nag Panchami : आखिर कब है नाग पंचमी? भूलकर भी न करें ये काम
नाग पंचमी केवल पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। यह त्योहार मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की भारतीय परंपरा को दर्शाता है।

Lucknow Desk : नाग पंचमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है। यह पर्व नाग देवताओं की पूजा और सम्मान के लिए मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार नाग पंचमी का त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए नाग पंचमी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस बार नाग पंचमी 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने और नाग देवता का स्मरण करने से जीवन में सुख, समृद्धि और भय से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आस्था है कि भगवान शिव की मन से पूजा करने से कालसर्प दोष से राहत मिलती है। मान्यता है कि नागों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। वरना भोले बाबा दुखी हो जाते है। इस लिए इस बात का विशेष ध्यान दिया जाता है कि पूरे सावन ऐसी गलती नही होनी चाहिए।
कब है नाग पंचमी 2026?
हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है. 2026 में यह त्योहार 17 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा.
पंचमी तिथि शुरू: 16 अगस्त 2026, शाम 4:52 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 17 अगस्त 2026, शाम 5:00 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त: 17 अगस्त, सुबह 6:04 बजे से 8:39 बजे तक
चलिए अब जानते है कि कैसे करें भोले बाबा की पूजा पहले तो नाग पंचमी के दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा स्थान या घर के मुख्य द्वार पर मिट्टी या गोबर से नाग देवता की आकृति बनाकर उनकी पूजा करें। नाग देवता को फूल, दूध और भोग अर्पित करें। दीपक जलाकर पूजा करें और आरती करें। इसके बाद नाग पंचमी की कथा सुनें। मान्यता है कि पूरे विश्वास और श्रद्धा से की गई पूजा से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
फिर शिवलिंग पर कच्चे दूध से अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करने से महादेव की कृपा बनी रहती है और भय एवं नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है। जलाभिषेक के लिए तांबे के लोटे का इस्तेमाल शुभ माना जाता है। शिव पूजा में तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना गया है। बेलपत्र अर्पित करते समय वह खंडित या सूखा न हो, इसका ध्यान रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धतूरा और भांग भगवान शिव को प्रिय माने जाते हैं। इन्हें श्रद्धापूर्वक अर्पित किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि इन पूजन सामग्रियों से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
रिपोर्ट : पलक त्रिवेदी



