टेंडर नहीं मिला... 39 लाख का काम पूरा कर दिया, पीलीभीत नगर पालिका में एक और कारनामा
without tender work worth ₹39 lakh completed Pilibhit Municipality

पीलीभीत। नगर पालिका परिषद में टेंडर जारी होने से पहले ही 39 लाख रुपये से अधिक के निर्माण कार्य पूरे कराए जाने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर मामला उठने के बाद अधिशासी अधिकारी (ईओ) संजीव कुमार ने संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर का वेतन रोककर जांच के आदेश दिए हैं।
नगर पालिका ने शनिवार देर शाम जेम पोर्टल पर दो कार्यों के लिए बिड अपलोड की थी। इनमें गन्ना तिराहे के सुंदरीकरण के लिए 15.92 लाख रुपये की लागत और 2.87 लाख रुपये जीएसटी सहित कुल 18.79 लाख रुपये का टेंडर शामिल था। वहीं, छतरी चौराहे पर आधुनिक छतरी लगाने के काम की लागत जीएसटी सहित 20.99 लाख रुपये दर्शाई गई थी। बिड तीन नवंबर को खुलनी थी।
आरोप है कि जिन कार्यों के लिए निविदा जारी की गई, वे पहले ही पूरे हो चुके थे। मामला सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। इससे पहले पालिका अध्यक्ष और ईओ ने इसे भूलवश हुई गलती बताया था। अब ईओ ने कंप्यूटर ऑपरेटर का वेतन आहरण तत्काल प्रभाव से रोकते हुए पूरे प्रकरण की जांच शुरू कराई है।
ईओ संजीव कुमार के अनुसार, जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी आरोप
नगर पालिका में कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग का ठेका बरेली की एक निजी कंपनी को दिया गया है। आरोप है कि पालिका से कर्मचारियों के वेतन के लिए ठेकेदार को जो राशि दी जाती है, वह पूरी रकम कर्मचारियों के खातों में नहीं पहुंचती। कागजों और धरातल पर कंप्यूटर ऑपरेटरों की संख्या में अंतर होने के आरोप भी लगाए गए हैं।
ईओ संजीव कुमार ने कहा कि वेतन और कर्मचारियों की संख्या से जुड़ा मामला उनके संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।



