करवा चौथ पर चाँद का इंतज़ार खत्म, अब महिलाएँ ऑनलाइन कर सकेंगी चंद्र दर्शन
29 अक्टूबर का दिन महिलाओं के लिए खास है क्योंकि गुरुवार यानी 29 अक्टूबर को करवा चौथ है और इस दिन व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए मौसम ने चिंता बढ़ा दी है।

Lucknow Desk : पति की लंबी आयु और घर में सुख-समृद्धि के लिए महिलाएँ पूरा दिन निर्जला उपवास रखती हैं। इस दिन को लेकर महिलाओं में खास उत्साह पहले से ही देखा जाता है, लेकिन इस बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए मौसम विभाग के द्वारा जारी अलर्ट ने चिंता बढ़ा दी है।
इस बार आसमान में बादल छाए रहने की संभावना जताई जा रही है। इसी को मद्देनज़र रखते हुए हो सकता है कि महिलाओं को हर साल की अपेक्षा अधिक और लंबा इंतज़ार करना पड़े।
करवा चौथ का व्रत अपने आप में विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन महिलाएँ अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि तथा पति की लंबी आयु के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक दिनभर बिना पानी तथा बिना फलाहार के व्रत रखती हैं।
चाँद को देखकर महिलाएँ तोड़ती हैं अपना व्रत
पूरा दिन निर्जला व्रत रखने के बाद औरतें सोलह श्रृंगार करके विधि-विधान से माता गौरी और गणेश जी की पूजा करती हैं तथा इसके बाद वे चंद्रमा को अर्घ्य देकर और पति का चेहरा देखने के बाद उनका आशीर्वाद लेकर अपना व्रत तोड़ती हैं। इसीलिए इस पर्व में चाँद निकलना जरूरी हो जाता है, लेकिन चक्रवात ‘अर्णब’ सक्रिय होने के कारण चाँद दिखाई नहीं देगा या महिलाओं को थोड़ा लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता है।
आइए आपको बताते हैं कि करवा चौथ क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे क्या कहानी है और कौन हैं करवा माता, जिनकी पूजा महिलाएँ करती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, करवा माता एक साहसी, निडर और पतिव्रता स्त्री थीं और उन्हीं के नाम पर भारत में करोड़ों सुहागिन महिलाएँ यह व्रत रखती हैं। ऐसा माना जाता है कि करवा माता, माता पार्वती का ही रूप मानी जाती हैं। इसीलिए इस दिन माता पार्वती की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है।
ऐसा माना जाता है कि जब देवताओं और असुरों में युद्ध शुरू हुआ और देवता असुरों से हारने लगे, तब ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं की पत्नियों से उनकी लंबी आयु के लिए व्रत रखने को कहा। ऐसी ही मान्यताएँ महाभारत काल के समय में भी मिलती हैं। भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने अर्जुन और पांडवों की लंबी आयु के लिए व्रत रखा था।
ऐसी ही कई मान्यताएँ कई पौराणिक कथाओं में मिलती हैं, हालाँकि इसका कोई साक्ष्य नहीं मिलता है। ऐसी ही एक कहानी और भी प्रचलित है, जो रानी वीरवती की है। ऐसा माना जाता है कि रानी वीरवती ने अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा था, लेकिन बिना चंद्रोदय के उन्होंने पानी पी लिया था। इसके बाद उन्होंने पश्चाताप किया और एक साल तक सच्ची निष्ठा और तपस्या से अपने पति का जीवन पुनः प्राप्त किया था।
हालाँकि, चाँद पूरी तरह दिखाई देगा या नहीं, यह पूरी तरह मौसम पर ही निर्भर करेगा। ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि चाँद बादलों के पीछे छिपा रह सकता है या देर से दिखाई देगा। यह मौसम पर ही निर्भर करेगा। ऐसे में महिलाओं को मौसम विभाग के हर अपडेट पर नज़र रखना चाहिए तथा अपने जिले या स्थानीय स्तर पर चाँद निकलने का समय जरूर पता कर लेना चाहिए, ताकि महिलाओं को लंबा इंतज़ार न करना पड़े।



