उत्तर प्रदेश

असहाय संतों के लिए सहारा बने रामदास कोठारी, अब तक 6000 से अधिक संतों का करा चुके हैं इलाज

Ramdas Kothari source of support for destitute saints medical treatment

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में जहां श्रद्धालु और संत-महात्मा भक्ति और साधना में लीन रहते हैं, वहीं कुछ ऐसे संत भी हैं, जिनका बुढ़ापे और बीमारी के दिनों में कोई सहारा नहीं होता। ऐसे ही असहाय और बीमार संतों की सेवा का संकल्प लेकर रामदास कोठारी तिलक द्वार के पास स्थित अस्वस्थ संत सेवा आश्रम में वर्षों से सेवा कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य उन संतों को सहारा देना है, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

रामदास कोठारी अस्वस्थ संतों को तलाशकर आश्रम तक लाते हैं और उनकी बीमारी के अनुसार उपचार की व्यवस्था कराते हैं। अब तक वह 6000 से अधिक संतों के इलाज में मदद कर चुके हैं। उनके लिए यह काम केवल सेवा नहीं, बल्कि अपने गुरु के आदेश का पालन और ईश्वर की भक्ति का माध्यम है।

रामदास कोठारी के जीवन की कहानी भी संघर्षों से भरी रही है। बताया जाता है कि जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना करने के बाद उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपनाया। उन्हें बार-बार गृहस्थ जीवन में वापस लाने का प्रयास किया गया, लेकिन ईश्वर के प्रति उनकी आस्था और संतों के प्रति श्रद्धा ने उन्हें सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ाया। आज उन्होंने अपना जीवन असहाय संतों की देखभाल के लिए समर्पित कर दिया है।

रामदास कोठारी बताते हैं कि उनके गुरु परम सिद्ध, प्रातः स्मरणीय रामहर्षण दास महाराज ने उन्हें सेवा का महत्व समझाया था। गुरुजी कहते थे कि संतों को भोजन कराने वाले तो बहुत लोग मिल जाते हैं, लेकिन जब संत वृद्ध हो जाते हैं या गंभीर बीमारी से ग्रसित होते हैं, तब उनकी देखभाल करने वाले बहुत कम होते हैं। गुरुजी की इसी सीख ने उनके जीवन की दिशा तय कर दी।

रामदास कोठारी का कहना है कि वह अपने गुरु के आदेश का पालन कर रहे हैं। असहाय संतों की सेवा करके उन्हें आत्मिक शांति और सुकून मिलता है। उनके लिए किसी बीमार संत के चेहरे पर राहत और संतोष देखना ही सबसे बड़ा पुरस्कार है।

अयोध्या में रामदास कोठारी का यह प्रयास मानवीय संवेदना, गुरु भक्ति और सेवा भाव की ऐसी मिसाल है, जो समाज को बुजुर्गों और असहाय लोगों के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराती है।

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