लखनऊ में ‘टेक संगम-2026’ का आगाज, AI और साइबर सुरक्षा पर CM योगी का जोर
UPSIFS में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान 2030 तक यूपी में 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य, क्वांटम लैब का शुभारंभ और 10 संस्थानों से समझौते

Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (UPSIFS), लखनऊ में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘टेक संगम-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 23 से 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस सम्मेलन के विशेष सत्र का शुभारंभ 24 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर फॉरेंसिक्स, क्वांटम तकनीक और डेटा सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज के समय में तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से करना जरूरी है। AI, साइबर फॉरेंसिक और डेटा सुरक्षा को साथ लेकर चलने से डिजिटल अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2030 तक 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश में पांच बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर बनाए जाएंगे। इससे तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
साइबर अपराधों से निपटने पर जोर
मुख्यमंत्री ने डीपफेक, साइबर धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और डिजिटल सबूतों से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश की सभी 18 पुलिस रेंज में आधुनिक फॉरेंसिक लैब स्थापित करने की दिशा में काम हो रहा है। इनमें से 12 प्रयोगशालाएं तैयार हो चुकी हैं। इसके अलावा, प्रदेश में 150 से अधिक फॉरेंसिक वैन तैनात की गई हैं।
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि अपराधों की जांच में वैज्ञानिक सबूतों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। DNA, फिंगरप्रिंट, CCTV फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से मामलों की सच्चाई सामने लाने में मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि UPSIFS अब तक 5,000 से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दे चुका है।
क्वांटम लैब का शुभारंभ, पुस्तक का विमोचन
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘AI in Construction’ पुस्तक का विमोचन किया। इसके साथ ही UPSIFS और Zscaler के सहयोग से ‘अभेद’ और ‘LEXQ’ क्वांटम लैब का शुभारंभ किया गया। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के अनुपालन की पहल भी की गई। इस अवसर पर 10 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने बताया कि सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञ साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण, डीपफेक और नई तकनीकों पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।
कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर, डिफेंस साइबर एजेंसी के महानिदेशक रियर एडमिरल संजय सचदेवा सहित कई विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य तकनीक, कानून और वैज्ञानिक जांच के बीच तालमेल बढ़ाना है, ताकि साइबर अपराधों से निपटने और जांच की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सके।



