UP Panchayat Elections 2026 : अमिट स्याही की खरीद के लिए 27 अक्टूबर से टेंडर प्रक्रिया, आयोग ने तेज की तैयारी
हाईकोर्ट के तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग सक्रिय। पांच लाख अमिट स्याही की खरीद की प्रक्रिया शुरू, 2 नवंबर तक टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी।

Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान के दौरान इस्तेमाल होने वाली अमिट स्याही की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। इसके तहत 27 अक्टूबर से निविदा प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि इसे 2 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। पांच लाख अमिट स्याही की खरीद से जुड़ी इस पहल को पंचायत चुनाव की तैयारियों में तेजी आने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग सक्रिय
यूपी पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद निर्वाचन आयोग की सक्रियता बढ़ी है। अदालत ने करीब 10 दिन पहले राज्य में पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद चुनावी तैयारियों से जुड़ी प्रक्रियाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
अमिट स्याही की खरीद के लिए टेंडर जारी करना इसी तैयारी का एक अहम हिस्सा है। हालांकि, टेंडर प्रक्रिया शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि चुनाव की तारीखों की आधिकारिक घोषणा भी हो गई है। चुनाव कार्यक्रम, मतदान की तिथि और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर आयोग की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
मतदान के दौरान क्यों जरूरी होती है अमिट स्याही?
चुनाव में अमिट स्याही का इस्तेमाल मतदाता की पहचान संबंधी प्रक्रिया के तहत किया जाता है। मतदान करने के बाद मतदाता की अंगुली पर स्याही का निशान लगाया जाता है। इसका उद्देश्य एक ही व्यक्ति को दोबारा मतदान करने से रोकना और मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने में मदद करना है।
इसी वजह से पंचायत चुनाव की तैयारियों में अमिट स्याही की उपलब्धता को भी जरूरी माना जाता है। पांच लाख स्याही की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ने से चुनावी व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त, प्रशासकों के जिम्मे व्यवस्था
प्रदेश में ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल मई में समाप्त हो चुका है। इसके बाद सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों की जगह आगामी छह महीने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति की थी।
प्रशासक व्यवस्था लागू होने के बाद ग्राम पंचायतों के कामकाज में निर्णय लेने की प्रक्रिया पहले जैसी नहीं रह गई है। संबंधित जानकारी के अनुसार, प्रशासकों को कार्यों के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होती है।
यानी ये मान के चलिए पंचायत चुनाव की तैयारियों पर सबकी नजरें टिकी हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और आयोग की ओर से आगे के निर्देश जारी होने के बाद चुनावी तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी। मतदाताओं और पंचायत प्रतिनिधियों को अब चुनाव कार्यक्रम से जुड़े आधिकारिक ऐलान का इंतजार है।



