Hapur : आखिर तीन दिन तक मोहित अस्पतालों में लावारिस क्यों भटकता रहा?
एक युवक नोएडा से अपने घर के लिए निकला, लेकिन घर नहीं पहुंचा। एक्सीडेंट के बाद वह तीन दिन तक अस्पतालों में लावारिस की तरह भटकता रहा। आखिर इस पूरे मामले में जिम्मेदार कौन है—पुलिस, अस्पताल या सिस्टम?

Lucknow Desk : हापुड़ के रहने वाले मोहित शर्मा की मौत के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि एक्सीडेंट के बाद मोहित तीन दिन तक लावारिस की तरह एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा जाता रहा, लेकिन समय पर उसकी पहचान नहीं हो सकी और न ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। आखिरकार इलाज के लिए दिल्ली ले जाते समय मोहित की जान चली गई ।
जानकारी के अनुसार, 8 तारीख की शाम मोहित शर्मा नोएडा से अपने घर हापुड़ लौट रहे थे। उन्होंने अपनी पत्नी को फोन कर बताया था कि वह शाम करीब 5 बजे तक घर पहुंच जाएंगे। लेकिन तय समय पर जब वह घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उन्हें कई बार फोन किया। मोहित का मोबाइल लगातार स्विच ऑफ आने लगा, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई।
परिजनों ने मोहित की तलाश शुरू की, लेकिन उनका कहीं कोई पता नहीं चला। इसके बाद उनकी पत्नी और मां हापुड़ कोतवाली पहुंचीं और पुलिस से मदद मांगी। परिजनों का आरोप है कि उस समय पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि पुलिस ने कहा कि शायद मोहित ने अपना मोबाइल बंद कर रखा है और वह कहीं घूमने गए होंगे।
जब काफी तलाश के बाद भी मोहित का कोई सुराग नहीं मिला तो परिवार के लोग लगातार पुलिस थानों और अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि मोहित की स्कूटी हापुड़ के रामा इंस्टीट्यूट के पास खड़ी मिली है। वहां जानकारी मिली कि एक अज्ञात व्यक्ति घायल मोहित को अस्पताल में भर्ती कराकर चला गया था। चूंकि उस समय उसकी पहचान नहीं हो सकी, इसलिए उसे अज्ञात मरीज के रूप में भर्ती किया गया।
इसके बाद मोहित को सरस्वती इंस्टीट्यूट से रामा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां भी पहचान न होने के कारण उसे लावारिस मानते हुए जिला अस्पताल भेज दिया गया। बाद में जिला अस्पताल से उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इस दौरान मोहित लगातार अस्पतालों के बीच भटकता रहा और उसके परिजन अलग-अलग जगह उसकी तलाश करते रहे।
जब परिवार को पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली तो वे मेरठ मेडिकल पहुंचे और वहां से मोहित को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले गए। परिजनों के अनुसार, मेरठ मेडिकल के डॉक्टरों ने बताया कि मोहित के सिर में गंभीर चोटें थीं। ऑपरेशन की सुविधा और आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध न होने के कारण उन्हें दिल्ली रेफर किया गया। लेकिन दिल्ली पहुंचने के बाद इलाज के दौरान मोहित ने अंतिम सांस ले ली।
मोहित के परिजनों का आरोप है कि यह केवल सड़क हादसा नहीं बल्कि उनके साथ मारपीट कर हत्या की गई है। वहीं पुलिस शुरुआती जांच में इसे सड़क दुर्घटना मान रही है। इस पूरे मामले को लेकर मोहित के परिजन और समाज के लोग हापुड़ के पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानेंद्र सिंह से मिले और निष्पक्ष जांच की मांग की।
एसपी कुंवर ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस घटना ने पुलिस और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि समय पर घायल की पहचान हो जाती और संबंधित विभाग सक्रियता दिखाते, तो शायद मोहित की जान बचाई जा सकती थी।



