मैं प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं हूं…..आनंदीबेन पटेल का बयान !
Anandiben Patel : राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई के दौरान कुछ छात्राएं गर्भवती हो जाती हैं और कई मामलों में उनके बच्चे भी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चे की जिम्मेदारी अंततः सरकार पर भी आती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने भविष्य और शिक्षा को प्राथमिकता दें तथा ऐसे कदमों से बचें, जो उनके जीवन और करियर को प्रभावित कर सकते हैं।

Lucknow Desk : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल कुलाधिपति के रूप में लखनऊ स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 24वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को डिग्रियां और शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में कुल 62,537 विद्यार्थियों और 53 शोधार्थियों ने भाग लिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार रखे, जिनमें कुछ बयान विशेष रूप से चर्चा का विषय बने।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई के दौरान कुछ छात्राएं गर्भवती हो जाती हैं और कई मामलों में उनके बच्चे भी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चे की जिम्मेदारी अंततः सरकार पर भी आती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने भविष्य और शिक्षा को प्राथमिकता दें तथा ऐसे कदमों से बचें, जो उनके जीवन और करियर को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रेम विवाह के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि दो लोग एक-दूसरे से प्रेम करते हैं तो उन्हें विवाह करना चाहिए, लेकिन तभी जब वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन जाएं और अपने पैरों पर खड़े हो जाएं। इस संदर्भ में उन्होंने अपने बेटे का उदाहरण देते हुए बताया कि जब वह पढ़ाई के लिए बेंगलुरु गया था, तब उन्होंने उससे कहा था कि यदि उसे कोई लड़की पसंद हो तो वह बता दे, वे विवाह करा देंगी। हालांकि, उनके अनुसार उनके बेटे को कोई पसंद नहीं आया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने देश की रक्षा क्षमता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिक क्रूज मिसाइल जैसी आधुनिक तकनीकों का विकास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत किसी से डरने वाला देश नहीं है और न ही किसी को डराने में विश्वास रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय था जब भारत मिसाइल और तोप जैसी रक्षा सामग्री विदेशों से आयात करता था, लेकिन अब देश रक्षा उपकरणों का निर्यात भी कर रहा है।
राज्यपाल ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की कई विश्वविद्यालयों में दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित तो हैं, लेकिन उनकी देखभाल और अध्ययन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री की पहल पर इन दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटल संरक्षण के लिए उन्हें दिल्ली स्थित एक केंद्र में एकत्रित किया जा रहा है। अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल तकनीक के उपभोक्ता न बनें, बल्कि उसके सृजनकर्ता भी बनें और नवाचार के माध्यम से देश के विकास में योगदान दें।
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