सपा की साइकिल ने MLC चुनाव में पकड़ी रफ्तार, क्या हैट्रिक लगा पाएगी योगी सरकार?
भाजपा 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने का लक्ष्य पूरा कर पाएगी या सपा एमएलसी चुनाव में मिली सफलता को विधानसभा चुनाव में भी दोहरा पाएगी?

Lucknow Desk: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई, जबकि भारतीय जनता पार्टी छह सीटों पर विजयी रही। मुकाबले का सबसे अहम पहलू यह रहा कि सपा ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में तीन सीटें जीतकर भाजपा को चुनौती दी। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा ने चार और सपा ने दो सीटों पर कब्जा जमाया।
आपको बताते चलें कि 23 अक्टूबर को हुए मतदान के बाद 27 अक्टूबर से शुरू हुई मतगणना 29 अक्टूबर को पूरी हुई। शुरुआती रुझानों में भाजपा छह सीटें जीत चुकी थी और सपा तीन सीटों पर आगे थी। लेकिन अंतिम नतीजों में सपा ने पांच सीटें अपने नाम कर लीं। इस तरह चुनावी मुकाबला 6-5 पर समाप्त हुआ।
गौरतलब है कि एमएलसी चुनाव और विधानसभा चुनाव का मतदाता वर्ग एक जैसा नहीं होता। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत स्नातक मतदाता और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निर्धारित पात्र शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं। इसके उलट विधानसभा चुनाव में सभी पात्र पंजीकृत मतदाता हिस्सा लेते हैं। इसलिए इन नतीजों को 2027 का सीधा जनादेश मानना राजनीतिक रूप से उचित तो नहीं होगा। लेकिन फिर भी इन परिणामों से दोनों प्रमुख दलों को अपने संगठन, मतदाता संपर्क और चुनावी रणनीति की समीक्षा करने का अवसर मिला है। भाजपा के सामने अपनी छह सीटों की बढ़त को विधानसभा चुनाव तक राजनीतिक समर्थन में बदलने की चुनौती होगी, जबकि सपा के लिए पांच सीटों की जीत को व्यापक जनाधार में बदलना अहम होगा।
बहरहाल अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने का लक्ष्य पूरा कर पाएगी या सपा एमएलसी चुनाव में मिली सफलता को विधानसभा चुनाव में भी दोहरा पाएगी?बहरहाल आगे क्या होगा यह तो आगे आने वाला वक्त ही बताएगा,लेकिन शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा की बढ़त ने भाजपा को आत्ममंथन को जरूर मजबूर कर दिया है।



